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    ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर भारत का करारा प्रहार, क्या नापाक हरकतों से तौबा करेगा पाकिस्तान

    ShagunBy ShagunMay 12, 2025 ब्लॉग No Comments6 Mins Read
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    सुशील कुमार

    6-7 मई 2025 की रात, जब दुनिया सो रही थी, भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक ऐसी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने आतंकवाद की रीढ़ तोड़ दी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात कमांडर और 1999 के कंधार विमान अपहरण के मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर की मौत ने न केवल आतंकवादियों को झकझोर दिया, बल्कि पाकिस्तान के गहरे तंत्र को भी एक कड़ा संदेश दिया। लेकिन सवाल यह है: क्या रऊफ की मौत आतंक की सरजमीं पर पनपते आतंकवादियों में भारत का खौफ बनाए रखेगी? क्या पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से तौबा करेगा, या यह छद्म युद्ध का सिलसिला जारी रहेगा?

    ऑपरेशन सिंदूर: भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक

    ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 निर्दोष लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का ही एक रूप माना जाता है। भारत ने इस हमले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हिस्सा बताते हुए तत्काल कार्रवाई की। भारतीय वायुसेना ने SCALP मिसाइलों और AASM हैमर बमों से लैस राफेल विमानों के जरिए बहावलपुर, मुरिदके, और मुजफ्फराबाद जैसे आतंकी गढ़ों को तबाह कर दिया।

    इस ऑपरेशन में अब्दुल रऊफ अजहर की मौत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। रऊफ, जो जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर का छोटा भाई और संगठन का ऑपरेशनल चीफ था, 2001 के भारतीय संसद हमले, 2016 के पठानकोट हमले, और कई अन्य आतंकी वारदातों का मास्टरमाइंड था। उसकी मौत ने जैश की कमर तोड़ दी, क्योंकि वह न केवल संगठन का रणनीतिक दिमाग था, बल्कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के संरक्षण में भारत के खिलाफ साजिशें रचता था।

    आतंकवादियों में भारत का खौफ

    रऊफ अजहर की मौत ने आतंकवादियों के बीच एक स्पष्ट संदेश भेजा है: भारत अब केवल चेतावनी नहीं देता, बल्कि आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारता है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद यह तीसरा बड़ा ऑपरेशन था, जो दर्शाता है कि भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब और सख्त हो चुकी है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने इस कार्रवाई को भारत की नई युद्धनीति की शुरुआत बताया। एक यूजर ने लिखा, “रऊफ अज़हर की मौत सिर्फ एक अंत नहीं, भारत की नई युद्धनीति की शुरुआत है। अब जो भारत की ओर आंख उठाएगा, उसकी कब्र वहीं खोदी जाएगी।” यह भावना दर्शाती है कि भारतीय जनता और सेना आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं।

    रऊफ की मौत से जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा। संगठन का कम्युनिकेशन नेटवर्क, प्रशिक्षण केंद्र, और हथियार भंडार तबाह हो चुके हैं। साथ ही, मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों और चार करीबी सहयोगियों की मौत ने संगठन के मनोबल को भी तोड़ा है। यह मनोवैज्ञानिक झटका आतंकियों के बीच भारत का खौफ बढ़ाएगा, क्योंकि अब वे जानते हैं कि उनकी सुरक्षित पनाहगाहें भी भारत के निशाने पर हैं।

    पाकिस्तान: तौबा या नापाक हरकतों का सिलसिला?

    पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वह आतंकवाद को अपनी रणनीतिक नीति का हिस्सा मानता है। 1990 के दशक में चीन की मदद से परमाणु हथियार हासिल करने के बाद, पाकिस्तान ने कश्मीर में छद्म युद्ध को बढ़ावा दिया। उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना आतंकियों को रणनीतिक और तकनीकी समर्थन देती रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी पाकिस्तान ने भारत के हमलों को “नागरिक क्षेत्रों पर हमला” करार दिया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी।

    पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने शुरू में दावा किया कि भारतीय सैनिकों को बंदी बनाया गया और विमानों को मार गिराया गया, लेकिन बाद में इसे खारिज करना पड़ा। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपनी जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, आतंकी याकूब मुगल और रऊफ अजहर के अंतिम संस्कार में आईएसआई और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी ने पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को फिर से बेनकाब किया।

    हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से कमजोर किया है। भारत ने झेलम और चिनाब नदियों का पानी रोककर और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को अप्रभावी साबित कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें रूस और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन पाकिस्तान पर आतंकवाद को रोकने का दबाव बढ़ रहा है।

    फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का गहरा तंत्र, जो आतंकवाद को पालता-पोसता है, इतनी आसानी से नहीं झुकेगा। ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव सीमित रह सकता है, जैसा कि 2019 के बालाकोट हमले के बाद देखा गया, जब आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब है, और वह चीन के समर्थन पर निर्भर है। जब तक आईएसआई और पाकिस्तानी सेना आतंकियों को समर्थन देती रहेगी, नापाक हरकतें जारी रह सकती हैं।

    बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य और रणनीतिक ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। यह ऑपरेशन न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि भारत के सैन्य इतिहास में एक मील का पत्थर भी साबित हुआ। रऊफ अजहर की मौत ने जैश-ए-मोहम्मद को कमजोर किया है, और भारत का खौफ आतंकियों के दिलों में बस गया है।

    लेकिन आतंकवाद का खात्मा केवल सैन्य कार्रवाइयों से नहीं हो सकता। पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना, उसकी आर्थिक कमजोरियों का इस्तेमाल करना, और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना जरूरी है। भारत को अपनी खुफिया तंत्र को और मजबूत करना होगा ताकि आतंकी साजिशों को पहले ही नाकाम किया जा सके। साथ ही, कश्मीर में विकास और स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई में महत्वपूर्ण होगा।

    ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है। अब्दुल रऊफ अजहर की मौत ने आतंकियों में भारत का खौफ पैदा किया है, और जैश-ए-मोहम्मद की कमर टूट गई है। लेकिन पाकिस्तान का इतिहास और उसका गहरा तंत्र बताता है कि वह आसानी से तौबा नहीं करेगा। जब तक पाकिस्तानी सेना और आईएसआई आतंकवाद को अपनी रणनीति का हिस्सा मानते रहेंगे, यह छद्म युद्ध जारी रहेगा। फिर भी, भारत की यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत कदम है, जो दुनिया को बता रहा है कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। – जय हिंद!

    Shagun

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