Quote of the Day :
सच बोलने वालों के पास भीड़ नहीं होती, लेकिन सुकून ज़रूर होता है। साइकोलॉजी कहती है जितना ज़्यादा कोई इंसान झूठ और दिखावे में जीता है उतनी बड़ी होती है उसकी मंडली क्योंकि हर झूठ हर नक़ाब कई झूठे रिश्तों को साथ बाँध लेता है। लेकिन जो इंसान सच्चा होता है वो भीड़ नहीं सच्चाई का बोझ उठाता है वो कम लोगों से जुड़ता है पर उन कुछ रिश्तों में ही पूरा संसार देख लेता है। आज के दौर में अगर तुम्हारे पास गिने-चुने लेकिन सच्चे लोग हैं तो समझो तुम अब भी असली ज़िंदगी जी रहे हो नकली नहीं !
आप जितने झूठे व मक्कार होंगे आपकी मित्र मण्डली उतनी ही बड़ी होगी और यदि आप जितने ही वास्तविक होंगे आपका मित्र मंडल उतना ही छोटा होगा।
मन से डर के भावों को उखाड़ फेंको
खुशी से जीने के लिए यह बेहद जरूरी है कि दिल डर की उड़ान भरती कल्पनाओं से पूरी तरह खाली रहे, क्योंकि डर की एक छोटी-सी आशंका भी दाखिल होते ही माहौल को शक की धुंध से भर देती है। मन से डर के भावों को उखाड़ फेंको; डरना एक अस्वाभाविक आदत है। प्रकृति नहीं चाहती कि इंसान डर के बोझ तले अपनी रूह को कुचले। तुम्हारे सारे डर, तुम्हारी उदासी, रोज की फिक्रें सब तुम्हारी ही पैदावार हैं। चाहो तो अपने अंतर्मन को भूत-प्रेत की कब्रिस्तान बना लो; चाहो तो उसे निडरता, विश्वास और जोश के फूलों से सजा लो। अनुकूल या प्रतिकूल हालात तुम्हीं रचते हो; कोई और तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता।
इच्छा करो तो परम निडर, बेफिक्र बन जाओ। तुम्हारी अच्छी-बुरी सोच, नाम-बदनामी के खयाल, विवेक और बुद्धि यही तुम्हारा भाग्य गढ़ते हैं। डर की एक शंका घुसते ही चारों तरफ वही दिखने लगता है जिससे हम डरते हैं। अगर डर को हमेशा के लिए मन के मंदिर से बाहर निकाल दो, तो भरपूर संतुष्ट और सुखी रह सकते हो। खुशी से जीने के लिए यह बेहद जरूरी है कि दिल डर की उड़ान भरती कल्पनाओं से पूरी तरह खाली रहे। आओ, आज से ही कसम खाएं कि हम अभय हैं; डर के राक्षस को पास न फटकने देंगे, विश्वास और श्रद्धा का दीया दिल में जलाए रखेंगे और निडर होकर परमात्मा की इस पवित्र सृष्टि में घूमेंगे।







