संघर्ष, दुःख, प्रतिकूल परिस्थिति, अभाव ये सब आपको निखार रहे हैं समस्या को स्वीकार करना ही समस्या का समाधान है। देवाधिदेव भगवान आशुतोष के जीवन से इस श्रावण मास में पूजन करते-करते कुछ सीखने और समझने योग्य है ये महादेव कैसे हुए ? जो अमृत पीते हैं वो देव बनते हैं जो राष्ट्र, समाज और प्रकृति की रक्षा के लिये विष को भी प्रेम से पी जायें वो महादेव बन जाते हैं,
बिना विष को पिये विषमता को पचाये कोई भी महान नहीं बन सकता आज के समय में अमृत की चाह तो सबको है पर विष की नहीं बिना विष को स्वीकारे कोई अमृत तक नहीं पहुँच सकता है संघर्ष, दुःख, प्रतिकूल परिस्थिति, अभाव ये सब आपको निखार रहे हैं समस्या को स्वीकार करना ही समस्या का समाधान है।







