मानो या न मानो : कशिश गंभीर का मानना है कि मेरे अनुभव के आधार पर : आत्मा ने मुझे परलोक से संदेश भेजा
ये मेरे लिए कोई नई बात नहीं है कि मृत आत्माएँ मुझसे संपर्क करती हैं। वे कुछ विशेष संदेश लेकर आती हैं जिन्हें वे अपने प्रियजनों तक पहुँचाना चाहती हैं। कई बार वे आत्माएँ होती हैं जिनसे मैंने कभी मिलना तो दूर, उनका नाम तक नहीं सुना होता। लेकिन इस बार जो हुआ, वो मेरे लिए भी नया था। इस बार मेरी अपनी बचपन की दोस्त ऋतु (बदला हुआ नाम) की माँ की आत्मा मुझसे संपर्क करने आई – जबकि वो अभी जीवित थीं। पहले तो मैं चौंक गई। ऋतु मेरी बचपन की दोस्त थी, लेकिन शादी के बाद वह काफी बदल गई थी और हम दोनों की बातचीत पूरी तरह से बंद हो गई थी।
लगभग दस साल हो गए थे हमारी आखरी बातचीत को हम साथ खेला करते थे, मैं अक्सर उसके घर जाती थी। उसी समय मेरी आध्यात्मिक यात्रा ने एक नया मोड़ लिया था। मुझे अपने आध्यात्मिक गुरु की उपस्थिति और मार्गदर्शन की बेहद जरूरत महसूस होने लगी थी। उसी समय मैं बाहरी दुनिया से थोड़ा कट चुकी थी और पूरी तरह ध्यान और साधना में डूबी हुई थी । मैं कशिश गंभीर हूँ- एक आध्यात्मिक शिक्षिका और मार्गदर्शक कई वर्षों से मैं ऐसी आत्माओं से जुड़ती रही हूँ, जो किसी प्रियजन तक कोई सन्देश पहुँचाना चाहती हैं।
कुछ दिन पहले, ऋतु की माँ की आत्मा मेरे पास आई और मुझसे अनुरोध किया कि मैं ऋतु से संपर्क करूँ और उससे दोबारा बात शुरू करूँ। उन्होंने ऋतु के पारिवारिक जीवन से जुड़ी एक बहुत ही व्यक्तिगत बात बताई और उस पर अपनी चिंता व्यक्त की। मैं शांत बैठी रही हमारी बातचीत दस साल पहले ही बंद हो चुकी थी। फिर मैंने दोबारा वही संदेश महसूस किया और निर्णय लिया कि अब मुझे उससे संपर्क करना चाहिए। मैंने उसका नंबर ढूँढ़ा और उसे कॉल किया। उस वक्त मुझे उसकी माँ की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
ऋतु ने बताया कि उसकी माँ बहुत बीमार हैं, और उन्होंने अपनी बीमारी को पूरे परिवार से छिपाया हुआ था। वे अस्पताल में भर्ती थीं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं थीं। सब कुछ स्पष्ट हो मैं समझ गई कि ये आत्मा की पुकार थी – शायद एक प्रार्थना के रूप में- जो मुझ तक पहुंच गई थी। मैंने ऋतु को उसकी माँ की चिंता और पारिवारिक जीवन से जुड़ संदेश बताया। उसने माना कि जो मैंने बताया, वो बिल्कुल सही था और ये बात केवल उसकी माँ को ही पता थी। इसके बाद, ऋतु अपनी माँ से मिलने अस्पताल गई, उन्हें गले लगाया और समय रहते उनके साथ कुछ पल बिता पाई। उसने मुझे दिल से धन्यवाद कहा और मैंने भी अपने भीतर एक शांति महसूस की एक माँ के अनुरोध को पूरा करके, जो शायद अपनी बेटी से जुड़ने का कोई और तरीका नहीं खोज पा रही थी।







