तितली के संघर्ष की कहानी जो आप को सोचने पर मजबूर कर देगी!

0
1765

बहुत समय पहले की बात है, अमन और लोकेश बहुत ही अच्छे दोस्त थे। अमन बहुत ही मेहनत करता था और हमेशा हर काम सही टाइम पर करता था जबकि लोकेश उसके विपरीत था और हर काम बहुत ही लेट करता था । वह बस यही चाहता था की सब कुछ बिना मेहनत के मिल जाये, लेकिन वह यह भूल गया था की जीवन में कठिन मेहनत करना जरूरी है। अगर आप ने अपने जीवन में संघर्ष नहीं किया तो आप अपने जीवन का मतलब ही नहीं समझ पावोगे।

एक दिन की बात है लोकेश बगीचे में अकेले ही बैठा था, तभी उसकी निगाह पेड़ पर बैठी एक तितली पर गयी। उसी पेड़ की पर टहनी से लटकता हुई एक तितली का कोकून दिखाई दिया, (तितली का अंडा , जिससे उसके बच्चे निकलते है ) । तितली बहुत ही संघर्ष कर रही थी लेकिन वह अपने अंडे से बाहर नहीं निकल पा रही थी । लोकेश यह सब बहुत ध्यान से देख रहा था , उसको बहुत ही मजा आ रहा था | थोड़ी देर बाद शाम हो गयी वह अपने घर चला गया। अगले दिन जब वह फिर आया तो देखा तितली अभी भी अपने अंडे से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रही थी ।

कुछ देर तक वह यह सब देखता रहा, जब उससे रहा नहीं गया तो वह घर जाकर एक कैंची ले आया और उसकी लेयर काट दिया और वह तितली बाहर आ गयी। वह बहुत खुश था की उसने तो बहुत ही अच्छा काम किया है लेकिन जब बहुत टाइम हो गया तो वह सोचने लगा की यह तितली उड़ क्यों नहीं पा रहा है । उसने अमन को भी बुलाया और उसको सारी बात बताई, अमन उसकी बात सुनकर बोला तुमने यह बहुत ही गलत किया है। तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए था, इस पर लोकेश को गुस्सा आ गया और बोला मैंने क्या गलत किया है।

फिर अमन ने उसको बताया की यह एक प्राकृतिक तरीका है तितली के अंडे से बाहर आने का, जब तितली अपने अंडे के झिल्ली से बाहर आने का संघर्ष करती है तब उसका पंख मजबूत होता है और वह आसानी से उड़ सकती है। लेकिन अगर वह संघर्ष नहीं करती है तो उसके पंख उड़ने लायक नहीं होते है, जैसा की इस तितली के साथ हुआ है। यह सुनकर लोकेश को बहुत दुःख हो रहा था कि उसने ऐसा क्यों किया, लेकिन एक बात और भी थी जो लोकेश अब यह जान चुका था कि जीवन में संघर्ष करना बहुत ही जरूरी है। नहीं तो आदमी कमजोर हो जाता है और जीवन में आगे नहीं जा पाता है।