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    खुशी हो या गम, राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन क्यों, MP के सीएम से भी सीख सकते हैं

    ShagunBy ShagunDecember 1, 2025Updated:December 1, 2025 ब्लॉग No Comments4 Mins Read
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    CM Mohan Yadav sets example by opting for mass wedding for son's marriage where saints & sadhus blessed couples.
    मध्यप्रदेश के सीएम यादव ने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में की
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    मध्यप्रदेश के सीएम यादव ने पेश की मिसाल, बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में की

    ओम माथुर 

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस बात के लिए तो तारीफ की जानी है चाहिए कि उन्होंने अपने बेटे का विवाह एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में किया और मेहमानों के नाम पर शादी को मेला नहीं बनाया। जैसा कि आजकल के नेताओं में फैशन हो गया है। शादी ही क्यों,अब तो बड़े नेता अपने घरों में होने वाले शोक को भी इवेंट का रूप दे रहे हैं। मोहन यादव के छोटे पुत्र अभिमन्यु ने कल उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर इशिता के साथ 21 अन्य जोड़ों के साथ फेरे लिए। चाहते तो मोहन यादव भी अपने बेटे का विवाह विलासिता के साथ भव्य स्तर पर आयोजित कर सत्ता की ताकत का बेजा इस्तेमाल कर सकते थे। वो भी देश भर के नेताओं को न्यौता देकर अपना रूतबा दिखा सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

    Madhya Pradesh CM Yadav marries son in mass marriage ceremony
    मध्यप्रदेश के सीएम यादव ने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में की

    यादव के बेटे की शादी में ना तो बहुत सारे राज्यपाल और मुख्यमंत्री थे और ना ही भाजपा के संगठन सत्ता से जुड़े बड़े नेता। केवल मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे। गहलोत और सिंधिया दोनों मध्यप्रदेश के हैं। मप्र सरकार के कूछ मंत्री भी थे। जिनका होना लाजिमी भी था,क्योंकि कोई आम आदमी भी अपने बेटे -बेटी का विवाह करता है, तो उसके दफ्तर के साथी और सहयोगी उसमें जरूर होते हैं। मोहन यादव का मंत्रिमंडल उनका सहयोगी ही है। यादव ने अपने बड़े बेटे का विवाह पिछले साल पुष्कर में किया था। उसमें भी बड़े नेताओं का कोई जमावड़ा नहीं था। हालांकि आयोजन एक बड़े रिसोर्ट में था और धूमधाम से हुआ था। लेकिन उसे विशुद्ध पारिवारिक रखा गया था। वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

    https://x.com/i/status/1995351671082455221

    दरअसल, नेताओं ने अब विवाह समारोहों को अपना रुतबा और ताकत दिखाने का जरिया बना लिया है। ये बड़े नेताओं को आमंत्रित करते हैं। जिनके आने के कारण जहां विवाह होता है,वहां सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था में बड़ी संख्या में पुलिस लगानी पड़ती है। प्रोटोकॉल के लिए प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए जाते हैं। अधिकारी भी नेताओं के सामने अपनी निष्ठा जताने के लिए जनता को भूल जाते हैं। जिससे सरकारी साधनों का विवाह में दुरुपयोग होता है। पिछले दिन राजस्थान में हुई सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर की पौत्री और 2 दिन पूर्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बेटे की शादी बड़े नेताओं के जमावड़े के कारण खासी चर्चा में रही। चलिए,शादी का खर्च तो मान लेते हैं नेता भुगत लेते हैं,( हालांकि इसमें भी नेताओं के भक्तों का बड़ा योगदान होता है ) लेकिन वीआईपी लोगों के आने से होने वाली व्यवस्था पर जो पैसा खर्च होता हैं वह तो सरकारी धन का दुरूपयोग ही है। हैलीपेड बनाए जाते हैं। वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

    https://x.com/i/status/1995171010358981042

    अगवानी के लिए कारकैड चलते हैं‌। कई नेता तो अपने बेटे-बेटी की शादी पर तीन-तीन, चार-चार भोज आयोजित करते हैं। एक भोज अपने निर्वाचन स्थल पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के लिए। फिर राज्य की राजधानी में वहां के नेताओं के लिए और आखिरी में दिल्ली में केंद्रीय सत्ता और संगठन जुड़े नेताओं के लिए। यानी शादियों में करोड़ों रुपए का खुद का खर्च और करोड़ों के सरकारी साधनों का दुरुपयोग। वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

    https://x.com/i/status/1995139710021411116

    शादियां ही नहीं,अब तो नेता अपने घरों में होने वाली मौत को भी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन बनाए जाने लगा है। हालात ये हो गई है कि जब तक किसी नेता के परिजन की मौत पर मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री बैठने नहीं आते,ऐसा लगता है मानो मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। बारह दिन रोजाना मंत्री और नेताओं के आने की खबरों को सोशल मीडिया पर डाला जाता है और स्थानीय अखबारों में प्रकाशित कराया जाता है। किसी के ग़म में उनके साथ सांत्वना और शोक व्यक्त करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन जब उसे प्रचार से जोड़ दिया जाए,तो वो सहानुभूति कम दिखावा ज्यादा लगता है।

    Shagun

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