दुनिया में पिछले कुछ दशकों में कई खतरनाक वायरस के हमले हुए। इनसे बड़े पैमाने पर लोगों की मौत भी हुई, जिसका आंकड़ा काफी बड़ा है। पिछले दो-तीन दशकों में इबोला, सार्स और स्वाइन फ्लू को सबसे किलर वायरस माना गया लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल रहा है और बड़े पैमाने पर चपेट में ले रहा है, उसके बाद कहा जा रहा है कि ये अब तक का सबसे खतरनाक वायरस है।
लंदन के स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन ने कोरोना वायरस के फैलने का एक मैप तैयार किया है। ये मैप बताता है कि कोरोना वायरस 70 देशों में फैल चुका है। इबोला, सार्स और स्वाइन फ्लू जो पिछले तीन दशक के सबसे खतरनाक वायरस माने गए, वो भी इतने देशों तक नहीं फैल पाए थे।

बता दें कि कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के शहर वुहान में दिसंबर में हुई। हालांकि उस समय चीन ने उससे सम्बंधित खबरों को दबाने या छिपाने की कोशिश की लेकिन जनवरी आते आते ये बेकाबू हो चुका था। जनवरी में इसकी पहचान कोरोना वायरस फैमिली के नए घातक सदस्य के तौर पर की गई। साथ ही ये खबरें भी आने लगीं कि इसके शिकार बड़े पैमाने पर बढ़ते जा रहे हैं। उसी गति से मरने वालों की तादाद भी बढ़ रही है
दुनियाभर में 60,000 से ज्यादा लोग चपेट में अगर मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें तो कोरोना वायरस दुनियाभर में 60,000 से ज्यादा लोगों को चपेट में ले चुका है। अकेले केवल चीन में इससे मौतों का आंकड़ा 1600 के आसपास पहुंच रहा है। चीन भरसक कोशिश के बाद भी इस पर काबू नहीं पा सका। चीन द्वारा इस खबर तो दबाने-छिपाने की वजह से ये वायरस दुनियाभर में फैल चुका है, क्योंकि दिसंबर और जनवरी में बड़े पैमाने पर जो लोग चीन आए और वहां से दुनिया के अन्य देशों में गए, वहां ये वायरस भी फैल गया। क्या अभी और बढ़ेगी बीमार और मृतकों की तादाद ब्रिटेन के टैबलॉयड ‘द सन’ के अनुसार फरवरी के मध्य तक पहुंचते पहुंचते ये बीमारी पीक पर पहुंच चुकी है। बीमारों के साथ मृतकों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
लंदन के जिस हाइजिन और ट्रॉपिकल मेडिसिन स्कूल ने जो मैप तैयार किया है, वो वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेश के आंकड़ों के साथ रियल टाइम स्थिति को दर्शाता है। इस पर तुरंत पता लग जाता है कि कोरोनावायरस के मरीजों की दुनियाभर में क्या स्थिति है। 25 देशों में फैल चुकी है बीमारी फिलहाल ये मैप दिखा रहा है कि ये वायरस चीन की सीमा को पार करता हुए 25 देशों में फैल चुका है। आने वाले समय में प्रभावित देशों की संख्या और बढ़ेगी। जबकि अब चीन में बीमारों की संख्या रोज हजारों की तादाद में बढ़ रही है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इसमें सबसे चिंताजनक बात ये है कि जिन लोगों को बीमारी हो रही है, उनमें इसके संकेत काफी देर से देखने को मिलते हैं, उन्हें खुद नहीं मालूम होता कि वो ये बीमारी साथ लेकर चल रहे हैं। इबोला की क्या स्थिति थी 2014 में जब दुनियाभर में इबोला महामारी ने दस्तक दी तो इसने 26800 लोगों को प्रभावित किया, जिसमें 40 फीसदी लोग मारे गए लेकिन उसका असर भौगोलिक तौर पर सीमित था।
ये वायरस आमतौर पर पश्चिमी अफ्रीका के तीन देशों तक ज्यादा फैला रहा। स्वाइन फ्लू से कितनी मौतें स्वाइन फ्लू का प्रकोप 2009 में देखा गया। हालांकि उससे बहुत कम लोग प्रभावित हुए लेकिन उसने दुनिया के हर देश और जगह पर मौजूदगी दिखाई। स्वाइन फ्लू से करीब छह करोड़ प्रभावित हुए। माना जाता है कि 01-02 लाख मौतें हुई। हालांकि कोरोना वायरस से इतने लोग ना तो बीमार नजर आ रहे हैं और न ही मौतों की संख्या इतनी ज्यादा लेकिन ये उन्हीं भौगोलिक इलाकों में फैलाव कर रहा है, जिसमें सार्स वायरस फैला था। इसका केंद्र सार्स की तरह ही चीन है और ये वहां से एशिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में पहुंच चुका है। सार्स का क्या असर हुआ था सार्स वर्ष 2003 के दौरान चीन से फैला था। उसकी वजह से करीब 1500 से 2000 लोगों की जान गई थी। ये बीमारी भी चीन से फैली थी। माना गया था कि वहां ये वायरस किसी जानवर या बर्ड मनुष्यों में पहुंचा और फिर हवा के जरिए फैलने लगा। कोरोना में आगे क्या होगा ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है।
खबरों के अनुसार ये खांसने या छींकने से हवा के जरिए फैल रहा है। दुनियाभर में साइंटिस्ट इसकी दवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी हैं। एक बार इससे गंभीर तौर पर बीमार होने के बाद इसमें बचने की संभावना कम नजर आई है। ये भी माना जा रहा है कि बीमारी अप्रैल तक जारी रहेगी। क्योंकि तब तक मौसम ठंडा रहेगा। जैसे जैसे तापमान बढेगा. कोरोना वायरस का खतरा कम होने लगेगा।







