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    Home»ब्लॉग»Hot issue

    निर्भया के दरिंदों का आखिरी समय

    By January 8, 2020Updated:January 8, 2020 Hot issue No Comments3 Mins Read
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    जी के चक्रवर्ती

    हमारे देश की न्यायिक व्यवस्था इतनी सुस्त है कि समाज मे होने अपराध में अपराधियों को इतनी देर से सजा मिलती है कि शायद अपराधी भी यह भूल जाता है कि हमे सजा होना है या नही। देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर वर्ष 2012 को हुए निर्भया मामले में उन चारों दोषियों को सजा दिये जाने के मामले में आज वर्ष 2020 में उन चारों अपराधियों को फांसी की सजा दिये जाने की तारीख 22 जनवरी के दिन निर्धारित किया गया है।

    जब भी देश मे महिलाओं, लड़कियों पर होने वाले अत्याचार से लेकर बलात्कार जैसे घटनाएं घटित होती तो देश के लोगों के जुबां पर केवल यही बात होती कि इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाये, अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और दुबारा ऐसी घटनाये घटित न होने पाये, हर हाल में इस तरह के घटनाओं को रोका जाना चाहिये। हालांकि हमारे बात से सभी लोग सहमत न हों लेकिन जन साधारण की यही एक धारणा होती है कि इस तरह के मामलों में अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। अपराधी तत्व किसी भी स्त्री के खिलाफ कितना बर्बर हो सकता है इसके उदाहरण स्वरूप निर्भया मामले को ले सकते है।

    हमें एक बार पुनः हमारे देश की न्यायिक प्रक्रियाओं पर पुनः विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि किसी भी मुक़दमे पर फैसला आते- आते इतना समय गुजर जाता है कि इसके कारण अपराधियों को इतना समय मिल जाता है कि आपराधियो द्वारा कोई न कोई जोर-जुगत लगा कर जेल से छूट जाते हैं या मुक़दमे को कमजोर करने में कामयाब हो जाते हैं। निर्भया मामले में 6 आरोपी थे जिनमे से एक आरोपी अवयस्क था जिसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया था एक अन्य आरोपी रामसिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर लिया था चूँकि भारतीय न्यायिक व्यवस्था अंतिम समय तक मृत्यु दण्ड पाये व्यक्ति को अपने बचाव करने के विकल्प देती है लेकिन इसका अर्थ कतई यह नही होना चाहिये कि व्यक्ति अपने सजा को अनंत काल तक टालने में लगा रहे।

    इसमे दूसरी बात यह है कि अपराधियों को सजा दिया जाने का प्रावधान इसलिये है कि जिससे समाज के लोगों में ऐसे अपराधों के प्रति भय पैदा कर सके इस तरह की अपने मूल उद्देश्य को ही खो देने के अलावा अपराधियों को मौत की सजा दिये जाने से जिसे सजा दिया गया है उसे अपने कुकृत्य पर पश्चाताप करने और सुधरने की गुंजाइश भी उसके मृत्यु से समाप्त हो जाती है और रह गयी बात समाज मे इस तरह के सजाओं के संदेशों से लोगों में ऐसे कुकृत्यों पर मिलने वाली सजा से खौफ पैदा किये जाने वाली बात तो इस विषय मे एक यही बात निकल कर सामने आती है कि ऐसे मामले में जब तक अपराधी को सजा मिलती है।

    तब- तक देश के आधे से अधिक लोग इस बात को ही भुला चुके होते हैं, ऐसी अवस्था मे हमारे देश मे दी जाने वाली सजाओं की दशा को सुधारे जाने की परम आवश्यकता है विशेषतः फांसी की सजाओं में फाँसी की सजा अपने मूल उद्देश्य को ही खो देने के अलावा इसमे यह बात जरूर है कि हम यह दावे के साथ यह नही कह सकते हैं कि इस सजा के बाद देश मे बलात्कार की घटनाये खत्म हो जायेगे, हां यह बात अवश्य है कि निर्भया मामले के बाद से देश मे बलात्कार से सम्बन्धित कानूनों में कई बड़े बदलाव जरूर किये गये हैं।

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