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    Home»Indian tourism spots

    महोबा: बुंदेलखंड की झीलों, पहाड़ों और धार्मिक स्थलों का खास संगम

    ShagunBy ShagunJuly 14, 2025 Indian tourism spots No Comments5 Mins Read
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    Post Views: 5,268

    नीतू सिंह

    बुंदेलखंड, मध्य भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन झीलों, पहाड़ों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र का महोबा जिला, जिसे कभी “महोत्सव नगरी” के नाम से जाना जाता था, पर्यटन की अपार संभावनाओं का खजाना है। यहाँ की झीलें, पहाड़ और धार्मिक स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि बुंदेलखंड की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास की कहानियाँ भी बयां करते हैं। आइए, महोबा और बुंदेलखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर एक नजर डालें।

    बुंदेलखंड की झीलें: जलमय नगरी की शान महोबा को चंदेल राजाओं ने अपनी राजधानी बनाकर इसे तालाबों और सरोवरों की माला से सजाया था। ये जलाशय न केवल जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

    मानसरोवर झील (गोरखगिरि, महोबा)

    गोरखगिरि पर्वत के पास स्थित मानसरोवर झील महोबा की प्राकृतिक और आध्यात्मिक सुंदरता का प्रतीक है। यह झील न केवल अपने शांत और रमणीय वातावरण के लिए जानी जाती है, बल्कि इसके आसपास चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों ने इसे पर्यटकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। सिद्ध सरोवर के साथ यह क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का केंद्र बन रहा है।

    राहिला सागर (सूरज कुंड)

    महोबा नगर से लगभग 3 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित राहिला सागर, चंदेल राजा राहिल देव (890-910 ई.) द्वारा निर्मित है। इसके बांध पर बना सूर्य मंदिर अपनी प्राचीन मूर्तियों और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जो उड़ीसा के कोणार्क सूर्य मंदिर की याद दिलाता है। यहाँ का शांत जल और मंदिर का ऐतिहासिक महत्व पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    उर्मिल बांध

    उर्मिल बांध एक और खूबसूरत स्थल है, जहाँ गेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण इसे पिकनिक और विश्राम के लिए आदर्श बनाता है।

    पहाड़: प्रकृति और आध्यात्म का संगमबुंदेलखंड का भूभाग पहाड़ियों और पठारों से भरा हुआ है, जो इस क्षेत्र को एक अनूठा प्राकृतिक आकर्षण प्रदान करता है।

    गोरखगिरि पर्वत

    महोबा का गोरखगिरि पर्वत न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि यह सिद्ध गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली भी है। यहाँ की शिव तांडव मूर्ति, जो काले ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से बनी है, और पास में बहता झरना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस क्षेत्र को “बुंदेलखंड का कश्मीर” भी कहा जाता है, जो राम, सीता और लक्ष्मण के वन गमन की कहानियों से जुड़ा है।

    गोखार पर्वत

    महोबा के कलेक्टरेट के पास स्थित गोखार पर्वत की पैनोरमिक रेंज पर्यटकों को लुभाती है। यहाँ की पहाड़ियाँ प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के लिए भी उपयुक्त हैं।

    धार्मिक स्थल: आस्था और इतिहास का खजानामहोबा और बुंदेलखंड के धार्मिक स्थल आस्था, कला और इतिहास का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।

    बड़ी चंडिका देवी मंदिर

    महोबा नगर में स्थित यह मंदिर शक्ति पीठ के रूप में पूजनीय है। किवदंती है कि यहाँ की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। यह मंदिर आल्हा-ऊदल जैसे वीरों की आस्था का केंद्र रहा है। मंदिर के पास जैन तीर्थंकरों की प्राचीन गुफाएँ और 24 तीर्थंकरों की उत्कीर्ण प्रतिमाएँ भी दर्शनीय हैं।

    शिव तांडव मंदिर (गोरखगिरि)

    गोरखगिरि पर्वत के पास यह मंदिर भगवान शिव की तांडव नृत्य मुद्रा में बनी विशाल मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। यह मूर्ति एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से बनी है, जो इसे अनूठा बनाती है। मंदिर के पास बहता झरना इसकी सुंदरता को और बढ़ाता है।

    सूर्य मंदिर (रहिलिया)

    राहिला सागर के पास स्थित सूर्य मंदिर चंदेल राजाओं की सूर्य उपासना का प्रतीक है। मंदिर में 4 फुट ऊँची सूर्य प्रतिमा और कोणार्क जैसी नक्काशीदार मूर्तियाँ इसे विशेष बनाती हैं।

    जैन तीर्थंकर स्थल

    बड़ी चंडिका मंदिर के पास एक पहाड़ी पर स्थित यह स्थल जैन धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ प्राचीन गुफाएँ और 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

    गोरखगिरि और सालट किले जैसे स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रयास सराहनीय : महोबा और बुंदेलखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरें और धार्मिक स्थल इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं। हाल के वर्षों में गोरखगिरि और सालट किले जैसे स्थलों के सौंदर्यीकरण के प्रयास सराहनीय हैं। सालट किले के लिए 1.59 करोड़ रुपये की विकास योजना और यूपीपीसीएल की नियुक्ति पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    हालांकि, इन संभावनाओं को साकार करने के लिए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को और प्रयास करने की आवश्यकता है। लोगों को बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास, आल्हा-ऊदल की वीर गाथाओं और यहाँ की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरूक करना होगा। स्थानीय स्तर पर बेहतर बुनियादी ढांचा, जैसे सड़क, आवास और गाइड की सुविधाएँ, पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद करेंगी।

    महोबा और बुंदेलखंड का पर्यटन स्थल प्रकृति, इतिहास और आध्यात्म का एक अनूठा मिश्रण है। मानसरोवर झील, गोरखगिरि पर्वत, सूर्य मंदिर और बड़ी चंडिका मंदिर जैसे स्थल यहाँ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को जीवंत करते हैं। इन स्थलों का विकास और प्रचार न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। यह समय है कि हम इस वीरभूमि की कहानियों को दुनिया तक पहुँचाएँ और इसे पर्यटन के नक्शे पर एक चमकता सितारा बनाएँ।

    Shagun

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