जिंदाबाद, मुर्दाबाद के नारे से देशद्रोह कैसे हो जाता है?

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देशप्रेम बनाम देशद्रोह

बुधवार को पंजाब से 25 लोगों का जत्था पाकिस्तान प्या-कटासराज मंदिर में महाशिवरात्रि मनाने। करतारपुर साहेब हर दिन कुछ सौ लोग जा ही रहे हैं। इनके अलावा साहित्यिक गोष्ठियों में आना-जाना चल रहा है, अभी-अभी शंघाई सहयोग संगठन की एक बैठक में हमारा प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में था। कबड्डी की टीम भी उधर जा रही है। जिनका बिजली, सीमेंट जैसा बड़ा कारोबार है, वह भी यथावत चल रहा है। फिर बंद क्या?

डाक, ट्रेन, लोगों का आपसी संपर्क! यदि पाकिस्तान भारत की सबसे बड़ी समस्या है, तो उसे दुश्मन देश घोषित करो, उसके साथ राजनयिक संबंध समाप्त करो। वहां चल रहे लोगों के धंधेबंद करो। जो लोग पाकिस्तानियों की साझेदारी में कंपनी चला हे हैं, उन्हें पाबंद करो महज किसी देश के जिंदाबाद, मुर्दाबाद के नारे से देशद्रोह कैसे हो जाता है? देश कोई कागज पर खींची गई लकीरों का दायरा नहीं, वह लोगों, वहां की भाषाओं, संस्कृति, लोक, सभ्यता का पुष्प गुच्छ है।

पता चला कि पाकिस्तान के डेरा गाजी खान व राजनपुर जिले के दिल्लू राय पहाड़ पर गुप्तकालीन साम्राज्य के अवशेष मेले हैं। सिख इतिहास या भगत सिंह की गाथा या सिंधु घाटी, हड़प्पा की सभ्यता का अध्ययन बगैर पाकिस्तान हो नहीं सकता- उसके मुर्दाबाद कहने में कैसा देशप्रेम?

पंकज चतुर्वेदी की फेसबुक वॉल से

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