संतवाणी : अजीत कुमार सिंह
हमेशा मुस्कुराते रहिये कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए। : हम अपने जीवन में ऐसी दृष्टि बनाये कि जीवन मे घटते हुए प्रत्येक प्रसंग को चलचित्र की भाँति देखे साक्षी भाव से जीवन मे चलते प्रसंग को देखें कोई हमे अपशब्द कहे अनाचार करे, दो कड़वे बोल बोले, कोई तिरस्कार करे कोई अन्याय करे सभी को जीवन में चलचित्र की तरह जाने देना चाहिए जीवन में जो बनते हुए प्रसंग हैं उनसे हम अलग नहीं रह सकते इतनी जागृति हममें नहीं है कि घटती घटना से अलग रहे क्योंकि हम सामान्य मनुष्य हैं सुख दुख तो स्वाभाविक रूप से जीवन मे आते ही रहते हैं. इसलिए वक्त अच्छा या बुरा गुजर ही जाता है लेकिन बाते और लोग हमेशा याद रहते हैं।
केवल जीत मायने रखती है
केवल जीत मायने रखती है वहीं इतिहास में लिखी भी जाती है उसी की चर्चा होती है बाकी सब आंकड़े हैं किसी भी चुनाव में नतीजे आने के बाद हारे हुए दल के नेता बैठकर टीवी डिबेट मे बात करते मिल जाएंगे कि हमारा तो वोट परसेंटेज बढा है हमे तो पिछले बार से ज्यादा वोट मिले हैं हमारा जनाधार बढा है ये सब निरा कोरा बकवास है…।
1983 के क्रिकेट विश्व कप में भारत रनों की कुल संख्या के हिसाब से और देशों के मुकाबिल छठवें नंबर पर था लेकिन वो वर्ल्ड कप भारत ही जीता था कारण उसने हर जरूरी मैच जीता भले ही कम रनो या कम विकटो से जीता लेकिन जीता अंततः उसने विश्व विजेता वेस्ट इंडीज को फाइनल में हराया कुल रनो की संख्या के अनुसार भारत से वेस्टइंडीज ने उस पूरी श्रृंखला में भारत से 1000 रन से ज्यादा बनाये थे पर वो फाइनल में जरूरी 44 रन नही बना सका और हार गया आपको कब कहां कितना और कैसे परफार्म करना है कि जीत मिले कितने मार्जिन से मिले वो बहुत महत्वपूर्ण नहीं है ।







