युवाओं की पहली पसंद अखिलेश

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गुजरात माडल की हकीकत क्या है। स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सभी क्षेत्रों में अफरातफरी मची है। विकास माडल जैसी बात करने वाले लोग गुजरात के विकास पर नजर डाल लेते तो अच्छा होता। स्वच्छ भारत का नारा देने वालों को गुजरात में गंदगी दिखाई क्यों नहीं देती है?


जीके चक्रवर्ती

अखिलेश यादव आज भले ही सत्ता में न हो लेकिन वह आज भी उत्तर प्रदेश में युवाओं की पहली पसंद है उनके कार्यकाल में चाहे भले ही उनकी सरकार के मंत्रियों पर कई गंभीर आरोप लगे लेकिन अखिलेश बेदाग़ ही रहे और यदि उनके पारिवारिक विवाद को छोड़ दिया जाये तो नेताजी के अखिलेश को राजनीति में लाने के निर्णय को एक तरह से सही और गंभीर फैसला कहा जायेगा, राजनीति के विश्लेलातमक पुरोधा तो यही मानते है क्योकि एक तो वह शिक्षित होने के साथ टेक्नोक्रेट है ऐसे ही अनेको योग्यताओं के अतिरिक्त वे मिलनसार, मृदुभाषी व्यक्ति होने के साथ ही बहुत भाव पूर्ण तरीके से लोगो के मिलना एवं उनकी समस्यायों को ध्यान से सुनकर उनका निराकरण करना यह उनकी प्रमुख विशेषताओं में है यही कारण है कि वे लोगो के प्रिय हो जाने के आलावा उन्होंने राजनीति परिपक्वता में निखारपन लाते हुए उसके सभी दावं पेचों को सीख कर उसमे निपुणता पाने की कोशिश करते रहे बतौर सपा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने गुजरात में चुनावी बिगुल फूकते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में द्वारका कि इस धरती पर हमने समाजवादी विचारधारा का बीजारोपण कर दिया जो आने वाले समय में एक बृक्ष बन कर फूलेगा-फलेगा।

अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान होने से पूर्व वे लगातार तीन बार सांसद भी रह चुके हैं। क्यू समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के अलावा समाजवादी पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलने पर वे वर्ष 15 मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्य मन्त्री पद की शपथ ग्रहण की। वर्ष 2016 में अखिलेश के पिता पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उन्हें उनके चाचा राम गोपाल यादव के साथ पार्टी से बाहर निकाल दिया परन्तु एक दिन भीतर ही उन्हें पुनः पार्टी में वापस भी ले लिया।
मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के बाद अखिलेश यादव ने अपनी सरकार के आग बढ़ाये जाने के रास्ते का खाका तैयार कर उसे
बहुत सख्ती के साथ लागू किया। उन्हें मुख्यमंत्री का पद संभाले ज्यादा दिन नहीं हुए, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यहाँ तक कह दिया था कि उत्तर प्रदेश में साढ़े तीन मुख्य्मंत्री हैं। हालाँकि, स्वमं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एवं उनकी पार्टी ने अमित शाह के इन आरोपों को नकारते हुए करारा जवाब दिया और इसे मात्र ‘ज़ुमलेबाज़ी’ जैसी बात करार दिया था, लेकिन अखिलेश यादव मुख्यमंत्री ने पद सँभाल कर अपनी योग्यता एवं सक्षमता का परिचय देते हुए यह साबित कर दिया था कि उत्तर प्रदेश में केवल एक ही मुख्य्मंत्री है और वह हैं अखिलेश यादव।

पूर्वांचल के मुख़्तार अंसारी के भाई अफ़ज़ाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को सपा में विलय करवा कर चुनावी समीकरणों के अनुसार वे अलग-अलग जगहों पर अपनी बातें अलग-अलग तरह से रखते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि पूर्वांचल की कुछ सीटों पर अपराधिक जैसे छवि होने के बावजूद मुख्तार अंसारी का प्रभाव होने से अंसारी बंधुओं का मुस्लिम वर्ग से सम्बन्ध रखने के कारण सपा के इस क्षेत्र में चुनावी दृष्टिकोण से यह विलय बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है इस बात को अखिलेश बखूबी समझ गए थे।

अखिलेश की इन खूबियों के साथ ही साथ प्रदेश में नौकरियों के मामले या प्रदेश के विकास के मामले से लेकर प्रदेश के पिछड़े वर्गों तक के लोगों को सुविधाएं देने की बात हो चाहे साहित्यकारों को मदद करने जैसी बात हो, प्रत्येक जगह सपा सरकार के अखिलेश ने आगे बढ़ कर काम किया और अखिलेश यादव गुजरात से लौट कर उन्होंने ने कहा कि साम्प्रदायिकता के आड़ में स्वार्थ की राजनीति करना ठीक नहीं इस के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्त्तमान समय में राजनीति में संकीर्ण स्वार्थों का बोलबाला होता जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को तहस नहस कर विकास जैसे मुद्दों से हट कर सांप्रदायिकता की आड़ में राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति करना उचित नहीं है। विकास के नाम पर जनता को धोखे में रखना नेतृत्व की साख को बट्टा लगाता है। बेरोजगार नौजवानों के सपनों से छल करना एक बड़े विश्वास को ठेस पहुचाने वाली बात होगी। देश के किसान हमारे अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गुजरात में किसानो की बदहाली देखकर दुख हुआ। कपास एवं मूंगफली के किसान को उनके उत्पाद का सही दाम भी नहीं मिल पा रहा हैं।

अखिलेश ने आगे कहा कि यहां पर आने के बाद पता चला कि गुजरात माडल की हकीकत क्या है। स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा सभी क्षेत्रों में अफरातफरी मची है। विकास माडल जैसी बात करने वाले लोग गुजरात के विकास पर नजर डाल लेते तो अच्छा होता। स्वच्छ भारत का नारा देने वालों को गुजरात में गंदगी दिखाई क्यों नहीं देती है?

उन्होंने इस चर्चा को आगे बढ़ते हुए प्रदूषण का प्रश्न भी उठाया और कहा कि वैचारिक प्रदूषणता के कारण भाईचारे और विकास का संकट है। उन्होंने आजादी के मूल्यों को बचाने पर भी चिंता जताते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता का जो संदेश साबरमती के तट से दिया था, आज भी वह प्रासंगिक है। उनका मत था कि लोकतंत्र को केवल ऊपर बैठे बीस तीस लोग मिल कर नहीं चला सकते हैं लोकतंत्र उस समय तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि उसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी न हो।

यह प्रदेश की जनता लिए बड़े गर्वे की बात है कि उन्हें 21वीं शदी के नेता के रूप में अखिलेश यादव जैसे व्यक्ति मिले। वे हमेशा प्रदेश की राजनितीक सियाशत में एक लम्बी पारी खेलने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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