अमेरिकन थिंकर रिपोर्ट में पाक को ‘गैर-भरोसेमंद’ करार, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में मांगों की सूची सौंपी, ट्रंप ने अपना प्रतिनिधिमंडल रद्द कर दिया
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद : अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है। अमेरिकन थिंकर में प्रकाशित रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए भरोसेमंद साथी नहीं, बल्कि एक “समस्या पैदा करने वाला” देश है। राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य सहयोग के बावजूद पाकिस्तान बार-बार अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करता रहा है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि अमेरिका पाकिस्तान को दिए गए ‘मेजर नॉन-नाटो एली’ (MNNA) दर्जे पर गंभीरता से दोबारा विचार करे। रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत किए, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दो बार व्हाइट हाउस गए, क्रिप्टो इंडस्ट्री में सहयोग की बात हुई, लेकिन पाकिस्तान इस भरोसे के लायक नहीं है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान कभी निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने हमास को समर्थन दिया, आतंकी संगठनों के साथ मंच साझा किए और ईरान के साथ खुलकर खड़े होकर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ रुख अपनाया। जून 2025 के युद्ध में पाकिस्तान ने ईरान का समर्थन किया और संयुक्त राष्ट्र में भी ईरान के पक्ष में वोट दिया।
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ बैठक की और अमेरिका के साथ स्थायी शांति के लिए एक “व्यावहारिक खाका” साझा किया। उन्होंने पाकिस्तान को आधिकारिक मांगों की सूची सौंपी, जिसमें तेल निर्यात पर पाबंदियों में ढील और अन्य शर्तें शामिल हैं। अराघची ने कहा कि अब देखना है कि अमेरिका कूटनीति के प्रति कितना गंभीर है।
लेकिन बातचीत को तुरंत झटका लगा। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद से रवाना होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव बिटकॉफ और जेरेड कुशनर की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेतृत्व में आपसी कलह है और “हमारे पास सारे पत्ते हैं, उनके पास कुछ नहीं। अगर बात करनी है तो फोन कर लें।”
ट्रंप प्रशासन ईरान से यूरेनियम बाहर भेजने और अन्य सख्त शर्तें मांग रहा है, जबकि ईरान पहले ढील चाहता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की महत्वाकांक्षा को इस घटनाक्रम से करारा झटका लगा है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी रिपोर्ट और ट्रंप का कदम दोनों ही इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में देखना अब मुश्किल हो गया है और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की राह और भी पेचीदा हो गई है।







