पाकिस्तान कश्मीर पाने के लिए क्या कुछ नहीं करना चाहता है वह तो भला हो दूसरे देशों का जो पाक के मनसूबे को समझते हुए उसे लिफ्ट नहीं देते! लेकिन फिर भी पाक अपनी दोस्ती का तकाजा देकर दूसरे देशों को अपनी बात समझाने की पूरी कोशिश करता है लेकिन लगभग अब सभी देश पाक के गलत मंसूबों को समझ गए हैं।
अभी ज्यादा पहले की बात नहीं है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब में वह दोस्ती थी जिसे दांतकाटी दोस्ती कहा जा सकता है। तब दोनों को एक दूसरे पर भरोसा था और उसी के मुताबिक सारा काम भी चलता जा रहा था।
इसी बीच कश्मीर का भूत पाक के सिर चढ़कर बोला और इस्लामिक देशों के मंच पर इस पर चर्चा करने की मांग सऊदी अरब से कर डाली पर सऊदी ने इसे किनारे कर दिया। नतीजन पाक विदेश मंत्री ने सऊदी अरब पर अपना गुस्सा निकाला। इससे पहले कश्मीर मसले पर समर्थन जुटाने के जोश में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के नजदीक पहुंच गए और वहां उन्होंने इस्लामी जगत का नेतृत्व करने की उनकी लालसा को बढ़ाया।
इमरान यहीं तक नहीं रुके बल्कि मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर के भी खास बन गए। महातिर भी कश्मीर पर पाक को अच्छे लगने वाले विचार व्यक्त करने लगे थे। इन सब बातों पर सऊदी अरब सतर्क निगाह रखे हुए था। पाक सेनाध्यक्ष कमर बाजवा को सऊदी शासकों का प्रिय पात्र माना जाता है, इसलिए मामला बिगड़ने के बाद बात बनाने के लिए उनको रियाद भेजा गया ताकि वह सऊदी शासकों को समझाकर मामला सुलटा सकें।
पाकिस्तान के हुक्मरान उस समय हैरत में रहे गए जब सऊदी अरब के प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने बाजवा को मिलने का समय ही नहीं दिया और उनको खासी फजीहत के बाद इस्लामाबाद लौटना पड़ा। बात केवल यहीं तक नहीं रुकी बल्कि सऊदी अरब पाक से वह कर्जा वापस मांग रहा है जो उसने तेल खरीदने के लिए उसको दिया था। जाहिर है कि फांस बहुत गहरे तक लगी है और इसका इलाज खोजने में फिलहाल पाक चौराहे पर आ गया है।







