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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    राजनीति का हमाम, चरित्र और नेतृत्व

    ShagunBy ShagunAugust 19, 2020Updated:August 22, 2020 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    जी के चक्रवर्ती

    आज के समय मे जो कोई भी व्यक्ति नेता बन गया तो उसका प्रमुख लक्ष्य केवल सत्ता तक पहुंचना होता है, कोई भी दल किसी भी व्यक्ति को वे झिझक चुनावी टिकट देने में श्लेष मात्र संकोच नहीं करता है जो व्यक्ति जीताऊ सदस्य है उसे टिकट अवश्य मिलेगा। इस बात से किसी तरह का कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह एक बलात्कारी या अपराधी है और उसके ऊपर सैकड़ो मुकद्दमे दर्ज हैं।

    वर्तमान समय मे भारतीय राजनीति एक क्लब की तरह हो गया है जिसमें किसी भी सदस्य को उस क्लब की सदस्यता हासिल करने के लिए उस क्लब के कुछ अन्य सदस्यों द्वारा सिफारिश करवाने जरूर पड़ती है, फिर शुल्क के रूप में एक भारी-भरकम राशि की अदायगी कर उस दल में शामिल हो जाते है। जब किसी भी व्यक्ति को एक बार सदस्यता प्राप्त हो जाती हैं, तो वह हमेशा अपना स्थान व अपना सहयोगी को बदल सकता हैं। अब उसे आजीवन सदस्यता प्राप्त है। वह जितनी दफे चाहें अपनी राजनीतिक पार्टि को बदले इसमे किसी प्रकार की कोई समस्या ही नहीं है, भले ही वह स्पष्ट रूप से वैचारिक झुकाव के विपरीत हों।

    आज के दौर मे भारतीय राजनीति में एक नया चलन शुरू हो गया है कि आपको पांच साल में एक बार जनता के सामने वोट मांगने उपस्थित होना पड़ेगा इसके अलावा पूरे पांच वर्षों के मध्य आप जो भी सोच रहे हों, जो भी कर रहे हों या जैसा भी अनुभव कर रहे हो उससे कोई फर्क नही पड़ता है बल्की उसकी ओर से तैयार किया हुआ एक प्रवक्ता प्रत्येक शाम को दूरदर्शन पर बहस कर एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुये झगड़ते दिखेंगे।

    कहने का अर्थ है कि राजनीति से अनिभिज्ञ देश की जनता को धर्म एवं जाति के नाम पर आपस में लड़वा कर सत्ता पर काबिज़ हो जाते है। जिसके नतीजे में समाज में आये दिन धर्म एवं जाति के नाम पर झगड़े फसाद और वैमनस्यता और आतंकवाद पनपता है। आज सभी पार्टिओ के नेता आपस में एक दूसरे पर छींटा कसी कर कीचड़ उछालने का काम करते आये दिन दिखाई देते है। लेकिन मौजूदा समय मे जब से केंद्रीय सत्ता के नेतृत्व में परिवर्तन हुये हैं तब से देश के राजनीति मे बहुत हद तक इस तरह के क्रियाकलापों कुछ अंकुश अवश्य लगता दिखाई देने लगा है, नही तो इस तरह से कोई किसी को चोर तो कोई किसी को देशद्रोही साबित करने में हमेशा तुला रहता है किसी को जनता कि समस्याओ से कोई भी लेना-देना ही नही होता है, बल्की इन मुद्दों को भुना कर वोट हासिल करने की राजनीति करते दिखाई देते थे, वैसे तो राजनीति में चुने गये उम्मीदवारों के लिए देश की जनता ही सर्वापरि होता है। देश के जनता की समस्याओं एवं परेशानियों को देश की सबसे बड़ी पंचायत में उठाने का हक केवल जनता द्वारा चुने गये इन्हीं नेताओं को है।

    देश की जनता अब तक न जाने ऐसे कितने ही मुद्दों को उठा कर सडक़ों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाती थी और इस तरह देश में आये दिन धरने प्रदर्शनों का सिलसिला बदस्तूर जारी रहता था इस तरह के हालातों में देश की जनता अपना रोष व्यक्त करने के लिए सड़कों तक उत्तर आती है।

    जब किसी भी देश की जनता को उसके छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सडक़ों पर उतरने का सहारा लेने पड़े तो समझिये उस देश का हाल कैसा होगा उस देश का कानून, जब किसी को न्याय पाने के लिये संघर्ष करना पड़े कोई मरीज ईलाज के लिए तड़प तड़प कर अपने प्राण त्याग दे। देश के शिक्षा की आड़ में करोड़ो रूपयों का चूना लगाने वाली शिक्षा प्रणाली पर अनेकों दिनों से सवाल उठाते चले आ रहे थे, देश के बेरोजगारों को सुनहरे सपने दिखा कर कई बार उनकी वोट हथियाने का काम किये गये हैं, इस तरह के समस्याओं के निवारण के लिये आज के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा देश की शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन कर देने से आने वाले नयी पीढ़ीयों में इसका गहन प्रभाव आगे आने वाले दिनों में दिखाई देगा।

    देश में मौजूदा समय मे कश्मीर से लेकर अनेको समस्याओं को खत्म कर दिया गया हैं अब यहां यह प्रश्न उठता है कि आज तक इससे पहले किसी भी पार्टी के राजनीतिक नेतृत्व के रहते यह सब काम क्यों नही हुये? इसी से स्पष्ट हो जाता है जब किसी को देश के लोगों की चिंता होगी तो उसी व्यक्ति या नेता को इससे परेशानी होगी अन्यथा नही। आज देश मे इसी तरह अनेको परिवर्तन हुये हैं इससे पहले यह परिवर्तन नही किये गये? दरअसल वास्तव में कहा जाये तो आज से पहले किसी को भी जनता की नही बल्की अपने घर की जनता तक की चिन्ता थी। लेकिन धीरे-धीरे देश की जनता अब जागरूक होकर उनके अंदर यह समझ आने लगी है कि हकीकत में कौन क्या है?

    वैसे कहा जाये तो हमाम में सारे नंगे लेकिन किसी भी नेतृत्व द्वारा किये गये सही और अच्छे कार्यों को किसी के द्वारा झुठलाया नही जा सकता है भले ही उन कार्यों का प्रतिफल देर से आये लेकिन वह आने वाले दिनों में दिखाई अवश्य देगा। इससे भी अधिक तो उस सोंच को अच्छा कहा जायेगा जो केवल अपने और अपनों तक सीमित न होकर दूसरों के लिये भी सोचता और करता हो लेकिन हमारे समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी आदत सर्वदा दूसरों के कामों में अडंगा लगा कर उनमे बुराई या गलती ढूंढते रहते है।

    खैर जो भी हो अब हमारे राजनेताओं के गलत कामों और भ्रस्टाचार को देश की जनता आगे सहन करने वाली नही है और जनता को कुछ न समझते हुए उनका अनादर करने जैसी बातों पर चुनाव के वख्त अपने मतों का प्रयोग कर उत्तर देने लगी है और यही स्थिति आगे भी बरकरार रहती है तो निश्चित ही देश मे बहुत बड़े परिवर्तन को नकारा नही जा सकता है। एक राजा अपने राज्य के सभी नागरिकों को प्रसन्न नही रख सकता है कोई न कोई तो ना खुश रहेगा ही लेकिन एक बात जो सर्वमान्य होता है उसे सभी लोग सहमत अवश्य होएंगे की किसी भी देश के जनता की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के मधेयनजर चिकित्सा, स्वस्थ, भरपेट भोजन और देश में किसी का भी शोषण न होने देना यही रामराज्य की अवधारणा भी है और मात्र मंदिर मस्जिद जैसे चीजें आस्था एवं धर्म का विषय है आस्था व धर्म से किसी भी व्यक्ति का पेट नही भर सकता है हां धर्म और आस्था व्यक्ति के व्यक्तिव एवं चरित्र निर्माण का कार्य वखूबी कर सकती है लेकिन भूखे पेट भजन न होत गोपाला।

    Shagun

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