युवा अध्यापकों के लिए ऑनलाइन क्लासेज करवाना बना वरदान पर पुराने अध्यापकों के लिए बना अभिशाप
कोरोना महामारी ने सभी को प्रभावित किया है। फिलहाल ऐसा कोई अछूता नहीं जो इससे बचा हो ! इस लॉकडाउन के दौरान शासन द्वारा माध्यमिक और प्राथमिक स्कूलों के बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं जबकि यहां पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास न तो स्मार्ट फ़ोन हैं और न ही इंटरनेट की सुविधा। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षण से भारी संख्या में छात्र शिक्षा से वंचित रह जाएंगे जो बच्चों की शिक्षा पाने के मूल अधिकार के विपरीत है।
सरकार द्वारा बच्चों को बिना संसाधन मुहैया कराए अचानक ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था लागू करना इन्हें शिक्षा से वंचित रखना ठीक नहीं है। आनन-फानन ऑनलाइन पढ़ाई की इस व्यवस्था के विरोध में उप माध्यमिक शिक्षक ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा था। अगर जमीनी हकीकत की बात की जाए तो माध्यमिक स्कूलों में गांव गरीब के बच्चे पढ़ते हैं, इनके पास फीस जमा करने और किताबें खरीदने तक के रुपये बड़ी मुश्किल से जुट पाते है। ऐसे में स्मार्ट फ़ोन खरीद कर और महंगा इंटरनेट डाटा भराकर बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे।
दूसरी समस्या शिक्षक भी ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए ट्रेंड नहीं है। जिसमें रिटायरमेंट के करीब एवं स्मार्टफोन से दूर रहे शिक्षको को काफी कठिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एवं युवा पीढ़ी शिक्षकों के लिए तो यह एक उपहार के समान है परंतु स्मार्टफेन से दूर रहे शिक्षकों के लिए यह आदेश एक श्राप सा बन गया है। ऐसे में सरकार व विभाग द्वारा ऑनलाइन शिक्षण से बच्चों की पढ़ाई कराने का तुगलकी फरमान केवल हवा हवाई साबित होंगे। इससे ना सिर्फस्मार्टफेन से दूर रहे शिक्षको को समस्याओं का सामना करना पडेगा अपितु बच्चों का भविष्य भी बर्बाद होगा माध्यमिक व प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को व्हाट्स एप वर्चुअल क्लासेज के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। मांग किया कि पहले बच्चो को ऑनलाइन शिक्षण के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराया जाए और शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण की विधि की ट्रेनिंग दी जाए। तभी ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था सफल होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना होगा। शिक्षकों की इस समस्या का निराकरण दीक्षा एप ने आसान कर दिया है। दीक्षा एप पर कक्षा एक से आठ तक सभी विषयों के पाठ्यक्रम को समाहित किया गया है। किस कक्षा के किस पाठ को पढ़ाना है, उसे क्लिक करते ही प्रारंभ हो जाएगा। गणित को समझाने के लिए सूत्र का भी प्रयोग किया गया है। जिससे आसानी से बच्चों के समझ में आ जाएगा।
एनड्राइड मोबाइल पर आवाज के साथ ही साफ चित्र भी दिखेगा मगर चित्र में कोई चेहरा नहीं होगा, बल्कि गणित लगाने का तरीका और अंग्रेजी के ग्रामर को स्पष्ट तरह से प्रकट किया गया है। दीक्षा एप को डाउन लोड करने वाले अध्यापक स्कूलों में इसका सहारा भी ले रहे हैं। अगर अध्यापकों की बात करें तो इससे पढ़ाई जहां आसान हुई है, वहीं शिक्षकों का बोझ भी हल्का हो गया है। हालांकि पुराने अध्यापकों के लिए यह काफी जटिल साबित हो रहा है। बच्चों को सवाल लगाते समय उन्हें समझाना होता है।
बच्चों के क्षमता की परख भी करनी होती है। ऐसे में दीक्षा एप पढ़ाई के लिए पूरी तरह सफल नहीं है। एवं पुरानी अध्यापकों के लिए जिन अध्यापकों को स्मार्टफोन की पूर्णता जानकारी नहीं उनके लिए यह बड़ी मुसीबत खड़ा कर रहा है साथ ही साथ प्रदेश के छोटे शहरों के गांव में जहां पर इंटरनेट सही से नहीं चल रहा है वहां भी यह अध्यापकों के लिए समस्याएं बनकर उभरता नजर आ रहा है साथ ही साथ अध्यापको के पास इंटरनेट का रिचार्ज कराने की कोई सुविधा शुल्क नहीं आ रही हैं। सरकार द्वारा लिये गये फैसले में इस बात का कोई विचार नहीं किया गया हैं।







