ये कैसा बदलाव?

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आपकी बात सोशल मीडिया के साथ : अंशुमाली रस्तोगी

बेटों ने बाप के शव को ‘हाथ’ लगाने और उनका ‘अंतिम संस्कार’ करने से इसलिए ‘मना’ कर दिया क्योंकि बाप की मौत ‘कोरोना संक्रमण’ के कारण हुई थी। बेटों को समझाया भी गया पर उन्होंने कहा- ‘बाप को कोरोना था। हम अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हमारे बच्चे छोटे हैं। हमारी भी फैमली है। कहीं हमें या उन्हें कुछ हो गया तो…’।

और एक आप यहां फेसबुक पर बैठे-बैठे चौबीस घंटे यही राग अलापते रहते हैं कि कोरोना काल निपटने के बाद दुनिया और समाज ‘बदल’ जाएगा। कितनी ‘खुशफहमी’ पाले हुए हैं हम। है न…। ये बहुत ही ‘कमीना समाज’ है। ये न कल बदला था। न आज बदला है। न भविष्य में बदलेगा।

अर्थतंत्र और डिजिटल पथ पर कितना ही बदल जाए किंतु अपनी सोच, अपनी फितरत, अपनी दुष्टताओं, अपने व्यवहार, अपने आचरण में कभी नहीं बदलेगा।

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